जीवो की निगाह में नेता..........................
गधे ने परमात्मा का लाख-लाख धन्यवाद किया - हे भगवान शुक्र है आपने मुझे नेता नहीं बनाया अन्यथा मुझे भी अधिकांश नेताओं की तरह निठल्ला रहकर धूर्तता से जीवन यापन करना पड़ता. यह सुनकर पास खडा नेता गधे पर गुराया, क्या समझते हो मै निठल्ला हूँ ?धूर्त हूँ?चालक हूँ ?गधा विनम्रता पूर्वक बोला - मुझे क्षमा करें आप ही तो किसी मुर्ख व्यक्ति को गधे की उपाधि देते हो, भला यह गली मै कैसे सेहेन कर सकता हूँ, मै भोला भाला इसीलिए तो भगवान से प्रार्थना करता हूँ की मुझे गधा ही रहने दो, कहीं मेरा सामना हिंदुस्तान के आप जैसे नेता से न हो जायेतभी वहां एक गिरगिट ने आकर कहा - मै तो मुसीबत में फस जाने पर ही अपने बचाव के लिए रंग बदलती हूँ परन्तु नेता तो क्षण- क्षण में रंग बदलते है, इतने में वहां कुत्ता भी आ पुहंचा और कहा - में अपने मालिक के घर की रखवाली में हमेशा तत्पर रहता हूँ परन्तु नेता तो मानव से ही घाट करता है, तभी फुंकारता हुआ सांप आ पुहंचा और बोला - में तो आताम्रक्षा मै ही डंक मारता हूँ परन्तु नेता तो स्वार्थवश पग- पग पर डंक मारता है. तभी वहां उड़ता हुआ कौवा आया वे बोला - मै तो अपनी जाती के लिए चालाकी से कम निकलता हू पर कुछ नेता अपने पेट के लिए मानव को भूदू मानते है और अपना पेट भरते है.एक एक करके कई पशु पक्षी आये और अपने जीवन से संतुष्ट हो कर नेता को कहने लगे की परमात्मा ने उन्हें अछी योनी में भेजा है.नेताजी पशु पशियो की बात सुनकर दो मिनट तो मोन रहे और फिर चल पड़े अगले शाहर की जनता को लुभावने वादों की लोलीपोप चुसाने.........................
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