Tuesday, June 23, 2009

तेरह बरस की इस मां से मिलिए.........

तेरह बरस की इस मां से मिलिए......
छत्‍तीसगढ के सुदुर सरगुजा के जिला मुख्‍यालय अंबिकापुर के जिला चिकित्‍सालय के नकीपुरिया वार्ड में तेरह बरस की मासूम जिंदगी के उस सवाल से जुझ रही है जिसका जवाब शायद विधाता के पास भी नहीं है। उरांव जनजाति की यह बच्‍ची पचास बरस के उस बुढ पडोसी की गलत नजरों का शिकार हुई जिसे इस बच्‍ची की मां काका और यह बच्‍ची नाना कहती थी। शराब के नशे में मदहोश बुजूर्ग ने इस बच्‍ची के साथ बलात्‍कार किया, मामला थाने पहुंचा और आरोपी को जेल भेज दिया गया। ल‍ेकिन बलात्‍कार के इस मामले के बाद बच्‍ची ने एक मासूम बिटिया को जन्‍म दिया है। तेरह बरस की बच्‍ची के साथ्‍ा वह हादसा हुआ है जिससे शायद पुरी जिंदगी वह उबर नहीं पाएगी। वहीं यह बच्‍ची खुद एक बच्‍ची की मां बन चुकी है । इन दोनों बच्चियों का जिनमें से एक मां है और एक बेटी दोनों का आखिर होगा क्‍या इसका जवाब किसी के पास नही है। मां बाप दिहाडी मजदुर है। परिवार की सबसे बडी तेरह बरस की इस बिटिया के साथ हुए हादसे के बाद उनके समझ ही नहीं आ रहा कि, वे अब करें तो क्‍या करें। गरीबी जिससे वे लगातार जुझ रहे है वह इस बात की इजाजत नहीं देती कि, परिवार का इस अनचाहे सदस्‍य की ढंग से देखभाल कर पाएं। बावजुद इसके कि, मासूम सदमें में है राहत का कोई हाथ अब तक नहीं बढा है। वहीं वह नन्‍ही परी जिसे दुनिया में आए कुछ घंटे ही हुए है वह अनजान है कि, आखिर आफत है तो क्‍या है । वह मासूम नन्‍ही आंखों से दुनिया को समझने की कोशिश कर कर रही है। इस पुरे मसले पर आप की राय सुझावों और प्रतिक्रियाओं की प्रतिक्षा रहेगी। आपकी सक्रियता अपेक्षित भी है और स्‍वाभाविक भी।

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